Belt and Road Initiative: BRI प्रोजेक्ट को लेकर भारत ने चीन से जताई नाराज़गी, जानें क्या है ये प्रोजेक्ट.. भारत क्यों कर रहा इसका विरोध?
क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
बता दें ये पहली बार नहीं है जब भारत ने BRI का विरोध किया है। इससे पहले भी कई मौकों पर भारत ने इसको लेकर अपनी असहमति जता चुका है। हालांकि इस वर्चुअल सम्मेलन में पीएम मोदी ने पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की जरूरत को अहम माना है। हालांकि इस बात पर भी जोर दिया गया है कि SCO चार्टर के मूल सिद्धांतों, सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना भी जरूरी है।
भारत क्यों कर रहा इसका विरोध?
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत चीन की किसी भी उस परियोजना का समर्थन नहीं करता, जिससे देश की सुरक्षा पर कोई भी असर पड़े। भारत का बीआरआई का समर्थन नहीं करने की सबसे बड़ी वजह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा है, जो कि इस परियोजना का एक हिस्सा है। यह प्रोजेक्ट उस रास्ते से होकर गुजरता है जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।
चीन को अरब सागर से जोड़ता है BRI
जानारी के लिए बता दें बीआरआई एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो मुख्य रूप से चीन को अरब सागर से जोड़ता है। यह चीन के झिंजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में काशगर से लेकर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह तक फैला है। यह परियोजना गिलगित बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है। और अरब सागर तक पहुंचने से पहले उत्तर से दक्षिण तक पाकिस्तान को पार करती है।
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